Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
महापुरुष · पृष्ठ 180
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1मायाबद्ध जीव करे गोविंद राधे।
2मृत्यु काल में जग स्मरण बता दे॥ 2064॥
3मायामुक्त भक्त करे गोविंद राधे।
4मृत्यु काल में हरि स्मरण बता दे॥ 2065॥
5मृत्यु पूर्व जाकी गोविंद राधे।
6आसक्ति जामें वाको स्मरण करा दे॥ 2066॥
7हरि को सुमिरि मरे गोविंद राधे।
8वाको हरि धाम ही मिलेगा बता दे॥ 2067॥
9मृत्यु पूर्व हरि ते जो गोविंद राधे।
10मिले हरि सुमिरेगा सोई बता दे॥ 2068॥
11सुत को सुमिरि मरा गोविंद राधे।
12अजामिल नहिं गया धाम बता दे॥ 2069॥
13विष्णुदूत यमदूत गोविंद राधे।
14वार्ता अजामिल को ज्ञान करा दे॥ 2070॥
15अजामिल मरा नहिं गोविंद राधे।
16गंगाद्वार जाके मन हरि में लगा दे॥ 2071॥
17भक्ति द्वारा भक्ति मिली गोविंद राधे।
18तब तनु त्यागा गया धाम बता दे॥ 2072॥
19अजामिल ने कहा था गोविंद राधे।
20मेरी थी भक्ति पूर्वजन्म की बता दे॥ 2073॥
21हरि हरिजन दिव्य गोविंद राधे।
22कर्म, योगमाया माया जैसा करा दे॥ 2074॥
23हर्ष शोक भय आदि गोविंद राधे।
24हरि हरिजन में भी दीखें बता दे॥ 2075॥