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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

महापुरुष · पृष्ठ 179

Reading 191 of 516 · Source nos. 2052–2063 · Source PDF 196

1अधम है शिष्य जो गोविंद राधे।

2आज्ञा माने बेमनी ते बता दे॥ 2052॥

3वह शिष्य शिष्य नहिं गोविंद राधे।

4जो गुरु आज्ञा न माने बता दे॥ 2053॥

5तन मन प्राण दै के गोविंद राधे।

6हरि गुरु दोनों को लूट ले बता दे॥ 2054॥

7हरि गुरु को ना दे तो गोविंद राधे।

8जग वाले लूट लेंगे अवशि बता दे॥ 2055॥

9जो भी हो अधिक प्रिय गोविंद राधे।

10सोइ हरि गुरु को तू दान करा दे॥ 2056॥

11या तो करु गुरुभक्ति गोविंद राधे।

12या तो हरि गुरु भक्ति साथ करा दे॥ 2057॥

13यम कह हरि गुरु गोविंद राधे।

14विमुख को ही मैं दण्ड दूँ बता दे॥ 2058॥

15हरि गुरु भक्तों को गोविंद राधे।

16करुँ मैं विनम्र प्रणाम बता दे॥ 2059॥

17ब्रह्मा शिव यम आदि गोविंद राधे।

18भक्त पै शासन करें ना बता दे॥ 2060॥

19यम के अधीन जग गोविंद राधे।

20भक्त यमसिर पै पैर धरा दे॥ 2061॥

21मायाबद्ध जीव का तोे गोविंद राधे।

22तनु छुड़वाया जाय कष्ट हो बता दे॥ 2062॥

23मायामुक्त हरिभक्त गोविंद राधे।

24तनु त्यागे निज इच्छा ते बता दे॥ 2063॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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