Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
महापुरुष · पृष्ठ 176
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1धन्य तो है हरि भक्त गोविंद राधे।
2जो और जीवों को भक्त बना दे॥ 2016॥
3हरि गुरु अनुकम्पा गोविंद राधे।
4पात्र अनुसार फल देती बता दे॥ 2017॥
5मेघ जल बिन्दु जब गोविंद राधे।
6तप्त लौह पै परे जल को जला दे॥ 2018॥
7मेघ जल बिन्दु जब गोविंद राधे।
8पद्म जल पै परे मोती सा बना दे॥ 2019॥
9मेघ जल बिन्दु जब गोविंद राधे।
10स्वाती सीप सिन्धु परे मोती बना दे॥ 2020॥
11मध्यमोत्तमाधम गोविंद राधे।
12गुण संसर्ग नरमात्र को दिला दे॥ 2021॥
13बुरा संसर्ग ऐसा गोविंद राधे।
14बड़े बड़े योगी को भोगी बना दे॥ 2022॥
15संसर्ग दोष देखो गोविंद राधे।
16मीठे नदी जल को सिन्धु खारा बना दे॥ 2023॥
17संसर्ग गुण देखो गोविंद राधे।
18मेघ सिन्धु जल को भी मीठा बना दे॥ 2024॥
19गुरु पद सेवा करो गोविंद राधे।
20गुरु पद सेवा प्रेम मेवा दिला दे॥ 2025॥
21पा पकरो गुरु गोविंद राधे।
22पा पकरे बिनु गति हरि ना दे॥ 2026॥
23हरि ते अधिक प्रेम गोविंद राधे।
24गुरु में हो गुरु प्रत्यक्ष बता दे॥ 2027॥