Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
महापुरुष · पृष्ठ 175
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1गुरु तो दिखावे हरि गोविंद राधे।
2माया मोतिया बिन्द आँख ते भगा दे॥ 2004॥
3सच्चा होय सद्गुरु गोविंद राधे।
4सच्ची हो शरण जो तो बिगरी बना दे॥ 2005॥
5सच्चा होय पारस गोविंद राधे।
6सच्चा हो जो लोहा सोना बना दे॥ 2006॥
7पारस हो असली किन्तु गोविंद राधे।
8लोहा हो नकली वाय सोना ना बना दे॥ 2007॥
9ऐसे गुरु शुद्ध किन्तु गोविंद राधे।
10मन हो अशुद्ध यदि, गुरु प्रेम ना दे॥ 2008॥
11पारस नकली हो गोविंद राधे।
12लोहा होे असली, ना सोना बना दे॥ 2009॥
13यदि गुरु दंभी हो गोविंद राधे।
14जीव चित्त शुद्ध भी हो काम ना बना दे॥ 2010॥
15गुरु भी हो सच्चा अरु गोविंद राधे।
16मन शुद्ध भी होे गुरु हरि ते मिला दे॥ 2011॥
17पारस बनावे सोना गोविंद राधे।
18लोहे को, गुरु तोहिं गुरु ही बना दे॥ 2012॥
19गिरि है सुमेरु व्यर्थ गोविंद राधे।
20जाके आश्रित तरु तरु है बता दे॥ 2013॥
21धन्य तो मलय है जो गोविंद राधे।
22आश्रित तरु को भी चंदन बना दे॥ 2014॥
23आत्माराम व्यर्थ गोविंद राधे।
24जो न किसी का कोई लाभ करा दे॥ 2015॥