Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
महापुरुष · पृष्ठ 172
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1हरि दर्शन ते ही गोविंद राधे।
2उर माया ग्रन्थि जाती है बता दे॥ 1968॥
3हरि दर्शन ते ही गोविंद राधे।
4सब संशय मिट जाते हैं बता दे॥ 1969॥
5हरि दर्शन ते ही गोविंद राधे।
6संचित कर्म भस्म होते हैं बता दे॥ 1970॥
7श्री गुरु चरणों में गोविंद राधे।
8श्रद्धा भक्ति हो तोे गुरु प्रेम दिला दे॥ 1971॥
9वेद गुरु वाक्य में हो गोविंद राधे।
10दृढ़ विश्वास वाको श्रद्धा बता दे॥ 1972॥
11श्रद्धा सत्संग ही ते गोविंद राधे।
12सन्त को कोई पहिचाने बता दे॥ 1973॥
13सात्विकी श्रद्धा तो है गोविंद राधे।
14आध्यात्मिकी एकमात्र बता दे॥ 1974॥
15राजसी श्रद्धा तो है गोविंद राधे।
16कर्म धर्म में जो प्रवृत्त करा दे॥ 1975॥
17तामसी श्रद्धा तो है गोविंद राधे।
18पाप कर्म में जो प्रवृत्त करा दे॥ 1976॥
19निर्गुण श्रद्धा तो है गोविंद राधे।
20श्यामा श्याम निष्काम सेवा बता दे॥ 1977॥
21सन्तों का संग यदि गोविंद राधे।
22सदा मिले तो सब बिगरी बना दे॥ 1978॥
23सन्तों का संग करो गोविंद राधे।
24श्रद्धा रति भक्ति सब क्रम ते दिला दे॥ 1979॥