Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
महापुरुष · पृष्ठ 171
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1पुनि दुर्वासा ने गोविंद राधे।
2रुक्मिणी तन खीर पोता बता दे॥ 1956॥
3पुनि कहा कृष्ण ते गोविंद राधे।
4रथ ले आओ चलें घूमने बता दे॥ 1957॥
5उस रथ में तुम गोविंद राधे।
6अरु रुक्मिणी बनो घोड़ा बता दे॥ 1958॥
7रुक्मिणी हो गईं गोविंद राधे।
8मूर्छित कृष्ण चले इकले बता दे॥ 1959॥
9कह दुर्वासा तब गोविंद राधे।
10कृष्ण तुम मेरे शिष्य पक्के बता दे॥ 1960॥
11किन्तु पद तलवे में गोविंद राधे।
12खीर नहिं पोता अपराध बता दे॥ 1961॥
13इस अपराध का तो गोविंद राधे।
14कभी ना कभी दण्ड मिलेगा बता दे॥ 1962॥
15कृष्ण मुस्कुराये कहा गोविंद राधे।
16मैंने जानि जानि के ना पोता बता दे॥ 1963॥
17निज धाम जाने के गोविंद राधे।
18पूर्व व्याध मारेगा बाण बता दे॥ 1964॥
19श्री गुरु चरणों में गोविंद राधे।
20शरणागति हो तो हरि ते मिला दे॥ 1965॥
21एक बार हरि मिले गोविंद राधे।
22माया जाय सदा सदा को ही बता दे॥ 1966॥
23एक बार हरि मिले गोविंद राधे।
24सदा सदा को आनन्द दिला दे॥ 1967॥