Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
महापुरुष · पृष्ठ 167
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1वैसे तो राम कृष्ण गोविंद राधे।
2सब विद्याओं के ज्ञाता बता दे॥ 1908॥
3वर्तमान में वे गोविंद राधे।
4नर शिशु सम पढ़ रहे थे बता दे॥ 1909॥
5एक बार सुन कर गोविंद राधे।
6सारी विद्यायें सीख लीं बता दे॥ 1910॥
7चौंसठ दिन में ही गोविंद राधे।
8चौंसठ कला विज्ञ हो गये बता दे॥ 1911॥
9पुनि राम श्याम ने गोविंद राधे।
10कहा अपने गुरुदेव ते बता दे॥ 1912॥
11पूज्य गुरुदेव जो गोविंद राधे।
12हो “गुरु-दक्षिणा” आप बता दें॥ 1913॥
13सान्दीपनि ने गोविंद राधे।
14जानि लिया राम श्याम ब्रह्म बता दे॥ 1914॥
15अतएव दक्षिणा गोविंद राधे।
16माँगी गुरु ने उनते बता दे॥ 1915॥
17प्रभास क्षेत्र में गोविंद राधे।
18मेरा सुत सिन्धु में डूबा बता दे॥ 1916॥
19उस मृत पुत्र को गोविंद राधे।
20तुम दोनों पुनि ला दो बता दे॥ 1917॥
21दोनों ने कहा अच्छा गोविंद राधे।
22जो आज्ञा गुरुदेव की बता दे॥ 1918॥
23पुनि गये राम श्याम गोविंद राधे।
24प्रभास क्षेत्र सिन्धु तट पै बता दे॥ 1919॥