Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
महापुरुष · पृष्ठ 165
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1गुरु के प्रपन्न हो जा गोविंद राधे।
2मन रूपी डोरी गुरु कर में थमा दे॥ 1884॥
3पूर्ण प्रपन्न हो जा गोविंद राधे।
4फिर हरि गुरु तेरा काम बना दें॥ 1885॥
5श्री गुरु चरणों में गोविंद राधे।
6सिर को ही नहिं मन को भी झुका दे॥ 1886॥
7श्री गुरु चरणों में गोविंद राधे।
8तन मन धन अर्पन करवा दे॥ 1887॥
9जब श्रीकृष्ण ने गोविंद राधे।
10कंस नृशंस को मारा बता दे॥ 1888॥
11तब कारागार ते गोविंद राधे।
12माता पिता को छुड़ाया बता दे॥ 1889॥
13वसुदेव देवकी गोविंद राधे।
14जानि गये कृष्ण ब्रह्म हैं बता दे॥ 1890॥
15याते श्याम राम को गोविंद राधे।
16उर ते लगाया नाहिं डर के बता दे॥ 1891॥
17तब श्रीकृष्ण ने गोविंद राधे।
18मोहिनी माया को बुलाया बता दे॥ 1892॥
19वसुदेव देवकी गोविंद राधे।
20भूलि गये कृष्ण हैं ब्रह्म बता दे॥ 1893॥
21तब राम श्याम को गोविंद राधे।
22उर ते लगाया दोनों ने बता दे॥ 1894॥
23पुनि वसुदेव ने गोविंद राधे।
24पुरोहित गर्ग बुलाया बता दे॥ 1895॥