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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

महापुरुष · पृष्ठ 159

Reading 171 of 516 · Source nos. 1812–1823 · Source PDF 176

1वैद्य कहे औषधि ले गोविंद राधे।

2रोगी कहे पूर्व मोहिं स्वस्थ बना दे॥ 1812॥

3गुरु कहे भक्ति करु गोविंद राधे।

4जीव कहे पूर्व हरि दर्शन करा दे॥ 1813॥

5दुराग्रही पापी जीव गोविंद राधे।

6बड़े बड़े जगद्गुरुओं को हरा दे॥ 1814॥

7सोये को जगा दें सब गोविंद राधे।

8झूठ मूठ सोये को कौन जगा दे॥ 1815॥

9ऐसे जिज्ञासु को गोविंद राधे।

10गुरु ज्ञान दे दे हठी गुरु को हरा दे॥ 1816॥

11हठी शठ निम्ब सम गोविंद राधे।

12दूध घी ते सींचो सदा मीठा ना बना दे॥ 1817॥

13भोला मूर्ख जिज्ञासु गोविंद राधे।

14शीघ्र मन हरि गुरु शरण करा दे॥ 1818॥

15मन है सुई सम गोविंद राधे।

16हरि गुरु हैं चुम्बक ज्यों बता दे॥ 1819॥

17सुई को शुद्ध करो गोविंद राधे।

18पुनि हरि गुरु आपु खींच लें बता दे॥ 1820॥

19गुरु तो है चुम्बक गोविंद राधे।

20मन तो है लोहा वाय शुद्ध बना दे॥ 1821॥

21गुरु शरणागति गोविंद राधे।

22श्यामा श्याम भक्ति मन शुद्ध करा दे॥ 1822॥

23गंगा जल शुद्ध जल गोविंद राधे।

24गंगा में मिले जो जल गंगा बना दे॥ 1823॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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