Skip to main contentJagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
महापुरुष · पृष्ठ 155
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2तू तो आत्मा है तेरा गोविंद राधे।
3सब कछु है परमात्मा बता दे॥ 1770॥
4गुरु है महात्मा गोविंद राधे।
5आत्मा को परमात्मा ते मिला दे॥ 1771॥
6“गु” का अर्थ माया तम गोविंद राधे।
7“रु” का अर्थ नाश करे सब को बता दे॥ 1772॥
8ईश्वरीय ज्ञान तो है गोविंद राधे।
9आवश्यक सर्वप्रथम बता दे॥ 1773॥
10ईश्वरीय ज्ञान हित गोविंद राधे।
11मन बुद्धि को गुरु शरण करा दे॥ 1774॥
12तत्वज्ञान हेतु दो हैं गोविंद राधे।
13एक गुरु एक वैराग्य बता दे॥ 1775॥