Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संसार · पृष्ठ 141
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1श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ गोविंद राधे।
2गुरु ते ही तेरा काम बनेगा बता दे॥ 1603॥
3जीव का भवरोग गोविंद राधे।
4जब ते भगवान तब ते बता दे॥ 1604॥
5हरि विमुखता अनादि गोविंद राधे।
6हरि विस्मृति भी अनादि है बता दे॥ 1605॥
7यदि कभु कृष्ण स्मृति गोविंद राधे।
8होती तो विस्मृति असम्भव बता दे॥ 1606॥
9श्रीकृष्ण विस्मृति गोविंद राधे।
10माया ते ही होती है बता दे॥ 1607॥
11स्मृति में है कारण गोविंद राधे।
12योगमाया माया गति ना बता दे॥ 1608॥
13तात्पर्य विस्मृति का गोविंद राधे।
14स्मृति पै अधिकार हो ना बता दे॥ 1609॥
15याते जीव का गोविंद राधे।
16भूला कभु सोचना है भ्रम ही बता दे॥ 1610॥
17हरि का विस्मरण गोविंद राधे।
18अंधकार जैसा है तत्व बता दे॥ 1611॥
19हरि का स्मरण तो गोविंद राधे।
20सूर्य प्रकाश ज्यों है तत्व बता दे॥ 1612॥
21जग का स्मरण हो तो गोविंद राधे।
22हरि का हो विस्मरण बता दे॥ 1613॥
23हरि स्मरण हो तो गोविंद राधे।
24जग का हो विस्मरण बता दे॥ 1614॥