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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

संसार · पृष्ठ 140

Reading 152 of 516 · Source nos. 1591–1602 · Source PDF 157

1ब्रह्म जीव दोनों उर गोविंद राधे।

2जीव ब्रह्म ओर पीठ किये है बता दे॥ 1591॥

3हरि की विमुखता है गोविंद राधे।

4सब मानसिक रोग मूल बता दे॥ 1592॥

5चार कारणों ते जीव गोविंद राधे।

6होता है श्रीकृष्ण विमुख बता दे॥ 1593॥

7प्रथम कारण तो है गोविंद राधे।

8पापाचार में प्रवृत्ति बता दे॥ 1594॥

9दूसरा कारण गोविंद राधे।

10मन की अधिक चंचलता बता दे॥ 1595॥

11तीसरा कारण गोविंद राधे।

12धन आदि का अभिमान बता दे॥ 1596॥

13चौथा कारण गोविंद राधे।

14हरि तत्व का अज्ञान बता दे॥ 1597॥

15उपर्युक्त कारणों में गोविंद राधे।

16सबते बड़ा अभिमान बता दे॥ 1598॥

17परदोष दर्शन गोविंद राधे।

18निज मन अभिमान और बढ़ा दे॥ 1599॥

19निरभिमानता का भी गोविंद राधे।

20होता है मन अभिमान बता दे॥ 1600॥

21हरि की विमुखता की गोविंद राधे।

22औषधि हरि सन्मुखता बता दे॥ 1601॥

23हरि सन्मुखता में गोविंद राधे।

24वैद्य एक गुरु अनिवार्य है बता दे॥ 1602॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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