Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संसार · पृष्ठ 139
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1आधिभौतिक ताप गोविंद राधे।
2नर पशु सर्प आदि ते हो बता दे॥ 1579॥
3आधिदैविक ताप गोविंद राधे।
4सर्दी गर्मी वर्षा आदि ते हो बता दे॥ 1580॥
5काम वात क्रोध पित्त गोविंद राधे।
6लोभ कफ तीन मुख्य दोष बता दे॥ 1581॥
7वात पित्त कफ साथ गोविंद राधे।
8हों जो कुपित सन्निपात बता दे॥ 1582॥
9वात पित्त कफ तीनों गोविंद राधे।
10सब तनु रोगों के मूल बता दे॥ 1583॥
11ऐसे काम क्रोध लोभ गोविंद राधे।
12सब मानसिक रोग मूल बता दे॥ 1584॥
13क्रोध लोभ का भी मूल गोविंद राधे।
14विविध जगत की है कामना बता दे॥ 1585॥
15जग कामना का मूल गोविंद राधे।
16देही को देह मान लेना बता दे॥ 1586॥
17देही को देह माना गोविंद राधे।
18याते मन देह सुख लक्ष्य बना दे॥ 1587॥
19देह मानने का मूल गोविंद राधे।
20भगवान की शक्ति माया बता दे॥ 1588॥
21माया अधिकार मूल गोविंद राधे।
22हरि ते विमुख हो जाना बता दे॥ 1589॥
23हरि ते विमुख तो है गोविंद राधे।
24जीव अनादि काल ते ही बता दे॥ 1590॥