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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

संसार · पृष्ठ 136

Reading 148 of 516 · Source nos. 1543–1554 · Source PDF 153

1सारा जग छान मारा गोविंद राधे।

2कहीं ना मिला आनन्द बता दे॥ 1543॥

3सारा जग छान मारा गोविंद राधे।

4प्यास बुझाये नहिं प्यास बढ़ा दे॥ 1544॥

5सारा जग छान मारा गोविंद राधे।

6ब्रह्मलोक तक सुख धोखा बता दे॥ 1545॥

7वास्तविक सुख तो है गोविंद राधे।

8हरि का अनन्त नित्य दिव्य बता दे॥ 1546॥

9जहाँ जा के लौटे नहिं गोविंद राधे।

10वह तो है दिव्य हरिधाम बता दे॥ 1547॥

11जो भी जाये आये जग गोविंद राधे।

12भक्त जाये आये नहिं लौट के बता दे॥ 1548॥

13जो भी जाये आये पुनि गोविंद राधे।

14भक्त जाये आये स्वेच्छा ते बता दे॥ 1549॥

15और आयें स्वार्थ हित गोविंद राधे।

16भक्त पर-उपकार हेतु बता दे॥ 1550॥

17जीव पति को मिलि गोविंद राधे।

18ज्ञानेन्द्रियाँ पाँच सौतें रुला दें॥ 1551॥

19कलि जीते बहुमत गोविंद राधे।

20पाँच ज्ञान इन्द्रियाँ मन को हरा दें॥ 1552॥

21पाँच सौतें एक पति गोविंद राधे।

22सब खीचें अपनी ही ओर बता दे॥ 1553॥

23ज्ञानेन्द्रिय विषय पाँच गोविंद राधे।

24शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गन्ध बता दे॥ 1554॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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