Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संसार · पृष्ठ 135
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1उसका भी शत गुना गोविंद राधे।
2सुख है मनुष्य गन्धर्व का बता दे॥ 1531॥
3उसका भी शत गुना गोविंद राधे।
4देव गन्धर्व का सुख है बता दे॥ 1532॥
5उसका भी शत गुना गोविंद राधे।
6पितृ चिरलोक लोक सुख है बता दे॥ 1533॥
7उसका भी शत गुना गोविंद राधे।
8आजानज देव सुख है बता दे॥ 1534॥
9उसका भी शत गुना गोविंद राधे।
10कर्म देव देव का सुख है बता दे॥ 1535॥
11उसका भी शत गुना गोविंद राधे।
12देवताओं का लोक-सुख है बता दे॥ 1536॥
13उसका भी शत गुना गोविंद राधे।
14स्वर्ग सम्राट इन्द्र का सुख बता दे॥ 1537॥
15उसका भी शत गुना गोविंद राधे।
16इन्द्रगुरु बृहस्पति सुख है बता दे॥ 1538॥
17उसका भी शत गुना गोविंद राधे।
18प्रजापति का सुख बड़ा है बता दे॥ 1539॥
19उसका भी शत गुना गोविंद राधे।
20ब्रह्मा का ब्रह्म लोक सुख है बता दे॥ 1540॥
21ब्रह्मलोक तक के तो गोविंद राधे।
22सुख नश्वर सीमित हैं बता दे॥ 1541॥
23ब्रह्मलोक पर्यन्त गोविंद राधे।
24माया काल कर्म अधिकार बता दे॥ 1542॥