Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संसार · पृष्ठ 129
Reading 141 of 516 · Source nos. 1459–1470 · Source PDF 146
1जो है तत्ववेत्ता गोविंद राधे।
2मायावी को ही चाहे बता दे॥ 1459॥
3जो है अतत्वज्ञ गोविंद राधे।
4माया के खिलौने में उलझे बता दे॥ 1460॥
5परिणाम वाद ग्राह्य गोविंद राधे।
6कार्य कारण संबंध में बता दे॥ 1461॥
7शक्तिमान सेवा ही गोविंद राधे।
8शक्ति स्वाभाविक धर्म है बता दे॥ 1462॥
9जीव श्रीकृष्ण शक्ति गोविंद राधे।
10शक्तिमान सेवा, शक्ति कार्य है बता दे॥ 1463॥
11अंशी की सेवा ही गोविंद राधे।
12अंश स्वाभाविक धर्म है बता दे॥ 1464॥
13जीव श्रीकृष्ण अंश गोविंद राधे।
14अंशी की सेवा, अंश कार्य है बता दे॥ 1465॥
15जग गोरखधन्धा गोविंद राधे।
16आदि भी न अन्त भी ना सन्त बता दे॥ 1466॥
17कुत्ता सूखी हड्डी खाये गोविंद राधे ।
18निज मुख रक्त चूसे हड्डी रक्त ना दे॥ 1467॥
19ऐसे मन जग में भी गोविंद राधे।
20सुख माने सुख पाये जग सुख ना दे॥ 1468॥
21बालू ते तेल मिले गोविंद राधे।
22भले ही, जग ते मिले सुख ना बता दे॥ 1469॥
23पानी ते घृत मिले गोविंद राधे।
24जग ते न सुख मिले कभू भी बता दे॥ 1470॥