Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संसार · पृष्ठ 128
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1जीव ने जग में जो गोविंद राधे।
2कल्पना की बस वही मिथ्या बता दे॥ 1447॥
3मणि रूपा सृष्टि एक गोविंद राधे।
4वह है ईश्वरकृत सत्य बता दे॥ 1448॥
5मणि में आसक्त को गोविंद राधे।
6मणि केपाने ते सुख हो बता दे॥ 1449॥
7मणि में आसक्त को गोविंद राधे।
8मणि केन पाने ते दुख हो बता दे॥ 1450॥
9मणि ते विरक्त को तो गोविंद राधे।
10ना ही सुख ना ही दुख हो बता दे॥ 1451॥
11जग का है कारण ब्रह्म गोविंद राधे।
12कारण है सत्य कार्य सत्य बता दे॥ 1452॥
13कृष्ण कार्य जग तो है गोविंद राधे।
14तनु हित तनु ही ते भजन करा दे॥ 1453॥
15हरि हैं मायावी गोविंद राधे।
16जग है माया का खिलौना बता दे॥ 1454॥
17मायावी सत्य वस्तु गोविंद राधे।
18माया का खिलौना अनित्य बता दे॥ 1455॥
19ख पुष्पवत् मिथ्या नहिं गोविंद राधे।
20जगत को सत्य अनित्य बता दे॥ 1456॥
21“यद्दृष्टं तन्नष्टं” गोविंद राधे।
22भाव सब दृश्य है नश्वर बता दे॥ 1457॥
23श्रीकृष्ण नित्य सत्य गोविंद राधे।
24जग है अनित्य याते त्याज्य बता दे॥ 1458॥