Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संसार · पृष्ठ 127
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1ब्रह्म में हो लीन जग गोविंद राधे।
2याते ब्रह्म है अधिकरण बता दे॥ 1435॥
3वैष्णवाचार्यों में गोविंद राधे।
4भिन्न भिन्न मत वैषम्य बता दे॥ 1436॥
5कोई कह जीव जग गोविंद राधे।
6ब्रह्म का ही है विशेषण बता दे॥ 1437॥
7कोई कह जीव जग गोविंद राधे।
8ब्रह्म ते सर्वथा पृथक है बता दे॥ 1438॥
9कोई कह जीव जग गोविंद राधे।
10ब्रह्म ते नित्य अभिन्न बता दे॥ 1439॥
11कोई कह जीव जग गोविंद राधे।
12ब्रह्म ते भिन्न अभिन्न बता दे॥ 1440॥
13कृष्ण सृष्टि कारण गोविंद राधे।
14सृष्टि है कृष्ण का कार्य बता दे॥ 1441॥
15कारण का ही गुण गोविंद राधे।
16कार्य में होता है जग में बता दे॥ 1442॥
17कारण कार्य में तो गोविंद राधे।
18विजातीय गुण नहिं होते बता दे॥ 1443॥
19हरि हैं विरुद्ध धर्मी गोविंद राधे।
20याते हरि ते विरुद्ध जग है बता दे॥ 1444॥
21कृष्ण कार्य जीव भोग्य गोविंद राधे।
22जग दो प्रकार का है सबको बता दे॥ 1445॥
23कृष्ण कार्य जग सत्य गोविंद राधे।
24जीव भोग्य जग मिथ्या सब को बता दे॥ 1446॥