Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संसार · पृष्ठ 126
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1जग की सत्ता नहिं गोविंद राधे।
2श्रुतियों ने ऐसा कहीं कहा ना बता दे॥ 1423॥
3यदि जग सत्ता नहिं गोविंद राधे।
4ब्रह्म जग योनि कैसे कहा है बता दे॥ 1424॥
5यदि वे जग मानें गोविंद राधे।
6तो फिर कर्ता भी मानें बता दे॥ 1425॥
7यदि जगकर्ता मानें गोविंद राधे।
8तो हरिशक्तियाँ भी मानें बता दे॥ 1426॥
9यदि हरिशक्ति मानें गोविंद राधे।
10इच्छा बल बुद्धि भी मानें बता दे॥ 1427॥
11यदि इच्छादि मानें गोविंद राधे।
12तो साकार ब्रह्म मानें बता दे॥ 1428॥
13वे तो ब्रह्म निर्गुण गोविंद राधे।
14निर्विशेष निराकार मानें बता दे॥ 1429॥
15सृष्टि का अर्थ यह गोविंद राधे।
16प्रलय पूर्व जग प्राकट्य करा दे॥ 1430॥
17हरि ना बनावें जग गोविंद राधे।
18जैसा पूर्व में था वैसा प्रकट करा दें॥ 1431॥
19हरि ते प्रकट जग गोविंद राधे।
20हरि व्याप्त हरि ही में लीन हो बता दे॥ 1432॥
21ब्रह्म ते निकला जग गोविंद राधे।
22याते ब्रह्म अपादान कारक बता दे॥ 1433॥
23ब्रह्म ते जीवित जग गोविंद राधे।
24याते ब्रह्म है करण कारक बता दे॥ 1434॥