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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

संसार · पृष्ठ 123

Reading 135 of 516 · Source nos. 1387–1398 · Source PDF 140

1जाले में खेले पुनि गोविंद राधे।

2अपने में करे लीन बता दे॥ 1387॥

3ऐसे ही आप भी गोविंद राधे।

4माया ते करें सृष्टि बता दे॥ 1388॥

5पुनि अपने में गोविंद राधे।

6उस सृष्टि को करें लीन बता दे॥ 1389॥

7यह सब आश्चर्य गोविंद राधे।

8मेरी बुद्धि ते गम्य नाहिं बता दे॥ 1390॥

9ऐसी कृपा करें गोविंद राधे।

10अहंकार आने नहिं पाये बता दे॥ 1391॥

11आप की आज्ञा ते गोविंद राधे।

12सृष्टि का कार्य करूँ मैं बता दे॥ 1392॥

13हरि ने कहा ब्रह्मा गोविंद राधे।

14गोपनीय ज्ञान सुनो ध्यान ते बता दे॥ 1393॥

15मेरा विस्तार जो गोविंद राधे।

16मेरे जो लक्षण दिव्य बता दे॥ 1394॥

17मेरे रूप गुण आदि गोविंद राधे।

18जितने हैं जैसे हैं बता दे॥ 1395॥

19मेरी कृपा ते तुम गोविंद राधे।

20वैसा अनुभव करोगे बता दे॥ 1396॥

21सृष्टि पूर्व मैं ही था गोविंद राधे।

22स्थूल सूक्ष्म अज्ञान था ना बता दे॥ 1397॥

23वर्तमान में जो है गोविंद राधे।

24वह भी एकमात्र मैं हूँ बता दे॥ 1398॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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