Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संसार · पृष्ठ 122
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1तुमने तपस्या की गोविंद राधे।
2हम हैं तुमते प्रसन्न बता दे॥ 1375॥
3जो चाहो वर माँगो गोविंद राधे।
4हम अभी तुमको देंगे बता दे॥ 1376॥
5सब साधन फल गोविंद राधे।
6मेरा अमोघ दर्शन है बता दे॥ 1377॥
7सृष्टि की रचना में गोविंद राधे।
8तुम तो थे असमर्थ बता दे॥ 1378॥
9याही ते तप की गोविंद राधे।
10आज्ञा दी थी मैंने बता दे॥ 1379॥
11तप ते करूँ सृष्टि गोविंद राधे।
12तप ते ही करुँ रक्षा बता दे॥ 1380॥
13तप ते प्रलय करूँ गोविंद राधे।
14तप ही है सर्वश्रेष्ठ बता दे॥ 1381॥
15ब्रह्मा ने कहा आप गोविंद राधे।
16सब उर पुर में साक्षी बता दे॥ 1382॥
17ऐसी कृपा करें गोविंद राधे।
18जाते हम जानें आप को बता दे॥ 1383॥
19जानें सगुण रूप गोविंद राधे।
20जानें निर्गुण रूप बता दे॥ 1384॥
21आप सत्य संकल्प गोविंद राधे।
22आप हैं मायाधीश बता दे॥ 1385॥
23मकड़ी ज्यों मुख ते गोविंद राधे।
24जाला आपु निकाले बता दे॥ 1386॥