Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संसार · पृष्ठ 121
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1अंग अंग मणिमय गोविंद राधे।
2भूषण ते भूषित है बता दे॥ 1363॥
3मूंगे वैदूर्य मणि गोविंद राधे।
4कमल तन्तु सी छवि है बता दे॥ 1364॥
5सिर पै है मुकुट गोविंद राधे।
6कान में कुण्डल कनक बता दे॥ 1365॥
7उस हरि धाम में गोविंद राधे।
8कमला करें पद सेवा बता दे॥ 1366॥
9ब्रह्मा ने देखा वहाँ गोविंद राधे।
10पार्षद करें परिचर्या बता दे॥ 1367॥
11पुरुष प्रकृति आदि गोविंद राधे।
12पच्चीस तत्व करें सेवा बता दे॥ 1368॥
13समग्र ऐश्वर्य गोविंद राधे।
14धर्म यश अरु श्री शक्ति बता दे॥ 1369॥
15ज्ञान वैराग्य छे गोविंद राधे।
16नित्य सिद्ध शक्ति युक्त हरि हैं बता दे॥ 1370॥
17स्वरूपानन्द में गोविंद राधे।
18हरि हैं नित्य निमग्न बता दे॥ 1371॥
19हरि दर्शन करि गोविंद राधे।
20ब्रह्मा हो गये मत्त बता दे॥ 1372॥
21सात्विक भाव सब गोविंद राधे।
22प्रकट हो गये देह में बता दे॥ 1373॥
23हरि ने कहा ब्रह्मा गोविंद राधे।
24तुमको है वेदज्ञान बता दे॥ 1374॥