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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

संसार · पृष्ठ 119

Reading 131 of 516 · Source nos. 1339–1350 · Source PDF 136

1प्रलय आत्यन्तिक गोविंद राधे।

2कैवल्य मोक्ष की प्राप्ति बता दे॥ 1339॥

3प्रकृति परिणाम शीला गोविंद राधे।

4मानो तो प्रलय कैसे होगा बता दे॥ 1340॥

5भगवान वीक्षित गोविंद राधे।

6पंच महाभूत की सृष्टि बना दे॥ 1341॥

7भगवान मुसकान गोविंद राधे।

8भौतिक अगणित विश्व बना दे॥ 1342॥

9भगवान सुप्ति ही गोविंद राधे।

10निखिल ब्रह्माण्ड का प्रलय करा दे॥ 1343॥

11महाप्रलय में तो गोविंद राधे।

12सावरण ब्रह्म अनुभव हो बता दे॥ 1344॥

13तीनों लोकों के गोविंद राधे।

14आदि देव परमदेव ब्रह्मा बता दे॥ 1345॥

15सृष्टि की इच्छा ते गोविंद राधे।

16कमल पै बैठे सोचें बता दे॥ 1346॥

17सृष्टि करने की गोविंद राधे।

18शक्ति नहीं है मो में बता दे॥ 1347॥

19सोच ही रहे थे गोविंद राधे।

20प्रलय समुद्र में ब्रह्मा बता दे॥ 1348॥

21दो अक्षर सुने गोविंद राधे।

22व्यंजन के तब कान में बता दे॥ 1349॥

23अक्षर व्यंजन का गोविंद राधे।

24सोलहवाँ इक्कीसवाँ बता दे॥ 1350॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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