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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

संसार · पृष्ठ 118

Reading 130 of 516 · Source nos. 1327–1338 · Source PDF 135

1जगत है ब्रह्म कार्य गोविंद राधे।

2ब्रह्म है जगत का कारण बता दे॥ 1327॥

3भूर्भुवः स्वः महः गोविंद राधे।

4जन तप सत्य सात लोक बता दे॥ 1328॥

5सात लोक और भी हैं गोविंद राधे।

6अतल सुतल अरु वितल बता दे॥ 1329॥

7तलातल महातल गोविंद राधे।

8रसातल पाताल लोक बता दे॥ 1330॥

9नैत्यिक प्रलय तो है गोविंद राधे।

10सुषुप्ति अवस्था का सब को बता दे॥ 1331॥

11दैनंदिन प्रलय है गोविंद राधे।

12ब्रह्मा के एक दिन कल्प में बता दे॥ 1332॥

13तैंतालिस लाख बीस गोविंद राधे।

14हजार वर्ष का चतुर्युग बता दे॥ 1333॥

15इकहत्तर चतुर्युगी गोविंद राधे।

16एक मन्वन्तर सम है बता दे॥ 1334॥

17चौदह मन्वन्तर का गोविंद राधे।

18ब्रह्मा का एक दिन कल्प है बता दे॥ 1335॥

19कल्प पश्चात् प्रलय गोविंद राधे।

20पुनि एक कल्प ब्रह्मा सोते हैं बता दे॥ 1336॥

21ब्रह्मा की पूर्ण आयु गोविंद राधे।

22इसी गणित ते सौ वर्ष की बता दे॥ 1337॥

23प्राकृत प्रलय तो है गोविंद राधे।

24ब्रह्मा के सौ वर्ष पश्चात बता दे॥ 1338॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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