Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संसार · पृष्ठ 117
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1वायु में दो गुण गोविंद राधे।
2किन्तु है प्रमुख एक स्पर्श ही बता दे॥ 1315॥
3आकाश में तो गुण गोविंद राधे।
4एक ही प्रमुख है शब्द बता दे॥ 1316॥
5हरि ते आकाश हुआ गोविंद राधे।
6फिर वायु अग्नि जल पृथ्वी बता दे॥ 1317॥
7नभ है निराकार गोविंद राधे।
8अचरज जग साकार बना दे॥ 1318॥
9आकाश स्पर्श हीन गोविंद राधे।
10अचरज स्पर्श वाला वायु बना दे॥ 1319॥
11वायु भी रूप हीन गोविंद राधे।
12अचरज रूप वाला तेज बना दे॥ 1320॥
13तेज भी रसहीन गोविंद राधे।
14अचरज रस वाला जल उपजा दे॥ 1321॥
15जल भी है गंध हीन गोविंद राधे।
16अचरज गन्ध वाली पृथ्वी बना दे॥ 1322॥
17सांख्य सृष्टि प्रकृति ते गोविंद राधे।
18जैसे गाय तृण खा के दूध दे बता दे॥ 1323॥
19किन्तु यदि तृण हेतु गोविंद राधे।
20हो तो बैल केभी दूध होगा बता दे॥ 1324॥
21पुरुष और प्रकृति गोविंद राधे।
22सांख्य में दोनों स्वतंत्र बता दे॥ 1325॥
23पुरुष अधीन प्रकृति गोविंद राधे।
24वेदान्त का सिद्धान्त बता दे॥ 1326॥