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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

संसार · पृष्ठ 116

Reading 128 of 516 · Source nos. 1303–1314 · Source PDF 133

1ब्रह्म है विरुद्ध धर्मी गोविंद राधे।

2याते परिणाम विकारी बता दे॥ 1303॥

3स्वरूप शक्ति द्वारा गोविंद राधे।

4आपु रहे नित्य अविकारी बता दे॥ 1304॥

5नर तनु चेतन गोविंद राधे।

6चेतन तन जड़ नख उपजा दे॥ 1305॥

7गोबर आदि जड़ गोविंद राधे।

8किन्तु चेतन बिच्छू उपजा दे॥ 1306॥

9आकाश एक गुणी गोविंद राधे।

10वह गुण केवल शब्द का बता दे॥ 1307॥

11वायु में दो गुण गोविंद राधे।

12एक शब्द है दूजा स्पर्श बता दे॥ 1308॥

13तेज में तीन गुण गोविंद राधे।

14शब्द, स्पर्श तीसरा है रूप भी बता दे॥ 1309॥

15जल में हैं चार गुण गोविंद राधे।

16शब्द, स्पर्श, रूप अरु रस भी बता दे॥ 1310॥

17पृथ्वी में पाँच गुण गोविंद राधे।

18शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध बता दे॥ 1311॥

19पृथ्वी में पाँच गुण गोविंद राधे।

20किन्तु प्रमुख है गंध ही बता दे॥ 1312॥

21जल में हैं चार गुण गोविंद राधे।

22किन्तु है प्रमुख एक रस ही बता दे॥ 1313॥

23तेज में तीन गुण गोविंद राधे।

24किन्तु है प्रमुख एक रूप ही बता दे॥ 1314॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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