Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संसार · पृष्ठ 114
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1मुक्त होने पै गोविंद राधे।
2पुनि अज्ञान आ जायेगा बता दे॥ 1279॥
3आम के वृक्ष में गोविंद राधे।
4सबको ही आम का भ्रम क्यों बता दे॥ 1280॥
5घोड़े का चार पैर गोविंद राधे।
6ऐसा भ्रम सबको ही हुआ क्यों बता दे॥ 1281॥
7विवर्तवाद मानो तो गोविंद राधे।
8सृष्टि अरु प्रलय व्यर्थ हों बता दे॥ 1282॥
9विवर्तवाद मानो तो गोविंद राधे।
10वेद सिद्धान्त व्यर्थ होंगे बता दे॥ 1283॥
11ब्रह्म की भगवत्ता गोविंद राधे।
12शंकर को स्वीकार्य ना बता दे॥ 1284॥
13भगवत्ता मान लें तो गोविंद राधे।
14अद्वैत सिद्ध नहिं होगा बता दे॥ 1285॥
15विवर्तवाद मायावाद गोविंद राधे।
16अद्वैतवाद तीनों एक हैं बता दे॥ 1286॥
17भगवत्ता मान लें तो गोविंद राधे।
18शक्ति शक्ति कार्य मान्य होंगे बता दे॥ 1287॥
19शक्ति कार्य मान लें तो गोविंद राधे।
20ब्रह्म सविशेष साकार हो बता दे॥ 1288॥
21सूक्ष्म चराचर हेतु गोविंद राधे।
22स्थूल चराचर है कार्य बता दे॥ 1289॥
23माया है जड़ शक्ति गोविंद राधे।
24जीव केस्वरूप में नहीं है बता दे॥ 1290॥