Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संसार · पृष्ठ 113
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1वेदान्त सूत्रों में गोविंद राधे।
2जगत् ब्रह्म का परिणाम बता दे॥ 1267॥
3किन्तु शंकराचार्य गोविंद राधे।
4विवर्तवाद सिद्धान्त चला दे॥ 1268॥
5मूल वस्तु अविकारी गोविंद राधे।
6परिणाम हो अन्य रूप बता दे॥ 1269॥
7रज्जु में सर्प भय गोविंद राधे।
8ऐसे ही है विवर्तवाद बता दे॥ 1270॥
9रज्जु ते सर्प अरु गोविंद राधे।
10सीप ते चाँदी पैदा हो ना बता दे॥ 1271॥
11याते विवर्तवाद गोविंद राधे।
12भ्रांत मति की ही है उपज बता दे॥ 1272॥
13श्रुति कह ब्रह्म तो है गोविंद राधे।
14जग का अन्तर्यामी बता दे॥ 1273॥
15रज्जु सर्प सदृश है गोविंद राधे।
16याते रज्जु में सर्प भ्रम हो बता दे॥ 1274॥
17ब्रह्म अरु जग में तो गोविंद राधे।
18कोइ सादृश्य स्वप्न में ना बता दे॥ 1275॥
19ब्रह्म है निराकार गोविंद राधे।
20जग साकार सादृश्य ना बता दे॥ 1276॥
21ज्ञान स्वरूप ब्रह्म गोविंद राधे।
22अज्ञान आवृत हुआ क्यों बता दे॥ 1277॥
23ज्ञान पै अज्ञान गोविंद राधे।
24यदि आ गया मान लें तो बता दे॥ 1278॥