Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संसार · पृष्ठ 112
Reading 124 of 516 · Source nos. 1255–1266 · Source PDF 129
1संसार वृक्ष की तो गोविंद राधे।
2शाखा पंच महाभूत हैं बता दे॥ 1255॥
3संसार वृक्ष के तो गोविंद राधे।
4शब्द स्पर्श आदि रस हैं बता दे॥ 1256॥
5संसार वृक्ष की तो गोविंद राधे।
6ग्यारह इन्द्रिय उपशाखा बता दे॥ 1257॥
7इस विश्व वृक्ष में तो गोविंद राधे।
8सुख दुख दो लगे फल हैं बता दे॥ 1258॥
9यह विश्व वृक्ष तो गोविंद राधे।
10ब्रह्म लोक तक है फैला बता दे॥ 1259॥
11वृक्ष के घोंसले में गोविंद राधे।
12ईश्वर जीव दो पक्षी बता दे॥ 1260॥
13इस विश्व वृक्ष में तो गोविंद राधे।
14वात पित्त कफ तीन छालें बता दे॥ 1261॥
15ब्रह्म स्रष्टा व्यापक गोविंद राधे।
16ब्रह्म सत्य याते जग सत्य बता दे॥ 1262॥
17हरि सृष्ट जग सत्य गोविंद राधे।
18मन सृष्ट जग तो है मिथ्या बता दे॥ 1263॥
19सत्य संकल्प हरि गोविंद राधे।
20हरि ते बना जग सत्य बता दे॥ 1264॥
21ब्रह्म जीव माया तीनों गोविंद राधे।
22जग रहें याते जग सत्य बता दे॥ 1265॥
23सब वैष्णवों का मत गोविंद राधे।
24जगत सत्य उपादान सत्य है बता दे॥ 1266॥