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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

शरणागति, कृपा · पृष्ठ 108

Reading 120 of 516 · Source nos. 1231–1242 · Source PDF 125

1मन गढ़ ऐसा जामें गोविंद राधे।

2एक कामना हो मोहिं प्रेम सुधा दे॥ 1231॥

3मन गढ़ ऐसा जामें गोविंद राधे।

4काम क्रोध आवे तो हरि का बना दे॥ 1232॥

5मन गढ़ ऐसा जामें गोविंद राधे।

6मैं गुरु हरि तीनों तीनों में मिला दे॥ 1233॥

7मन गढ़ ऐसा जामें गोविंद राधे।

8माया भगा दे योगमाया बुला दे॥ 1234॥

9मन गढ़ ऐसा जामें गोविंद राधे।

10गुरु ते कहु मोहिं पद सेवा दे॥ 1235॥

11मनगढ़ ऐसा जामें गोविंद राधे।

12मन यार में हो तन कार में लगा दे॥ 1236॥

13मनगढ़ ऐसा जामें गोविंद राधे।

14गुरु उर बैठे हरि झलक दिखा दे॥ 1237॥

15मनगढ़ ऐसा जामें गोविंद राधे।

16हरि गुरु दोनों रहें दोनों ते मिला दे॥ 1238॥

17मनगढ़ ऐसा जामें गोविंद राधे।

18हरि गुरु में गुरु हरि में समा दे॥ 1239॥

19मनगढ़ ऐसा जामें गोविंद राधे।

20हरि कहे गुरु याको प्रेम सुधा दे॥ 1240॥

21मनगढ़ ऐसा जामें गोविंद राधे।

22जित देखूँ हरि गुरु ही दिखा दे॥ 1241॥

23मनगढ़ ऐसा जामें गोविंद राधे।

24माया काल आवें नहिं आवें तो भगा दे॥ 1242॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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