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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

शरणागति, कृपा · पृष्ठ 107

Reading 119 of 516 · Source nos. 1219–1230 · Source PDF 124

1वेद शास्त्र ज्ञान यह गोविंद राधे।

2श्याम ही में आठों याम मन को लगा दे॥ 1219॥

3कछु काल हरि भक्ति गोविंद राधे।

4कछु काल जग भक्ति धोखा बता दे॥ 1220॥

5मन माया जग में जो गोविंद राधे।

6चला जाय वहाँ हरि गुरु को बिठा दे॥ 1221॥

7मन में हो हरि प्रेम गोविंद राधे।

8फिर वा ते जैसा चाहे कर्म करा दे॥ 1222॥

9मन यदि जग में हो गोविंद राधे।

10तन ते भजन करे निष्फल बता दे॥ 1223॥

11मुख कह तू ही मेरा गोविंद राधे।

12मन कह जग मेरा धोखा बता दे॥ 1224॥

13मन में जो छल हो तो गोविंद राधे।

14आपु ही छल सब पाप करा दे॥ 1225॥

15लोभ यदि मन में है गोविंद राधे।

16अवगुण सब आपु आवें बता दे॥ 1226॥

17मन यदि शुद्ध है तो गोविंद राधे।

18चारों धाम जाना है व्यर्थ बता दे॥ 1227॥

19मन गढ़ ऐसा जामें गोविंद राधे।

20नित्य विहार करें निकरन ना दे॥ 1228॥

21मन गढ़ ऐसा जामें गोविंद राधे।

22माया यदि आवे मायापति को दिखा दे॥ 1229॥

23मन गढ़ ऐसा जामें गोविंद राधे।

24इन्द्रिन होड़ गुरु मोहिं सेवा दे॥ 1230॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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