Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
शरणागति, कृपा · पृष्ठ 109
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1मनगढ़ ऐसा नित गोविंद राधे।
2राधे राधे गोविंद कीर्तन सुना दे॥ 1243॥
3मनगढ़ ऐसा जामें गोविंद राधे।
4सोते जागते हो राधे प्रेम अगाधे॥ 1244॥
5मनगढ़ ऐसा धाम गोविंद राधे।
6जहाँ हरि गुरु बिनु माँगे कृपा दें॥ 1245॥
7मनगढ़ ऐसा जामें गोविंद राधे।
8हरि गुरु होड़ करि उर ते लगा दें॥ 1246॥
9मनगढ़ ऐसा जामें गोविंद राधे।
10हरि गुरु दोनों होड़ करके कृपा दें॥ 1247॥
11मनगढ़ ऐसा जामें गोविंद राधे।
12नित ही “कृपालु” रहें और कृपा दें॥ 1248॥