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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

शरणागति, कृपा · पृष्ठ 103

Reading 115 of 516 · Source nos. 1171–1182 · Source PDF 120

1भाव था यह जीव गोविंद राधे।

2श्रीकृष्ण को प्राप्त कर ले बता दे॥ 1171॥

3श्रीकृष्ण प्राप्ति हित गोविंद राधे।

4वेदों को भी किया प्रकट बता दे॥ 1172॥

5बार बार श्रीकृष्ण गोविंद राधे।

6लै के अवतार आये जग में बता दे॥ 1173॥

7अपने जनों को भी गोविंद राधे।

8बार बार भेजा समझाने बता दे॥ 1174॥

9अपराधी सुत गोविंद राधे।

10लखि माँ दे जैसे दण्ड बता दे॥ 1175॥

11उसमें है वात्सल्य गोविंद राधे।

12माँ का, सुधार हो सुत का बता दे॥ 1176॥

13ऐसे ही जीव जब गोविंद राधे।

14वेद विरुद्ध करे पाप बता दे॥ 1177॥

15तब श्रीकृष्ण उसे गोविंद राधे।

16दण्ड दें नरकादि भोग बता दे॥ 1178॥

17दण्ड का अभिप्राय गोविंद राधे।

18निज सुत जीव-कल्याण बता दे॥ 1179॥

19संसारी दुःख भी है गोविंद राधे।

20हरि की अव्यक्त कृपा ही बता दे॥ 1180॥

21तनु व्याधि धन हानि गोविंद राधे।

22जग का अभाव हरि कृपा है बता दे॥ 1181॥

23कुन्ती ने वर माँगा गोविंद राधे।

24जग वैभव मोहिं ना दे ना दे ना दे॥ 1182॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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