Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
शरणागति, कृपा · पृष्ठ 98
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1पुनि जड़ शक्ति का गोविंद राधे।
2चैतन्य पै अधिकार क्यों बता दे॥ 1111॥
3माया यद्यपि जड़ गोविंद राधे।
4हरि शक्ति पाके हरि सम है बता दे॥ 1112॥
5माया को गीता में गोविंद राधे।
6कहा गुणमयी दैवी शक्ति बता दे॥ 1113॥
7वस्तुतस्तु माया का गोविंद राधे।
8शक्तिमान है भगवान बता दे॥ 1114॥
9याते हरि शक्ति पाके गोविंद राधे।
10माया हो हरि के समान बता दे॥ 1115॥
11याते हरि हरिजन गोविंद राधे।
12तजि कोउ माया को जीता ना बता दे॥ 1116॥
13बड़े बड़े योगी ज्ञानी गोविंद राधे।
14माया ते मानि चुके हार बता दे॥ 1117॥
15परा तो है जीव शक्ति गोविंद राधे।
16अपरा है माया माया परा को नचा दे॥ 1118॥
17जीव की बिसात क्या है गोविंद राधे।
18माया ते डरें ब्रह्मादि भी बता दे॥ 1119॥
19श्याम शक्ति पाके माया गोविंद राधे।
20विधि हरि हर के भी छक्के छुड़ा दे॥ 1120॥
21नारद मुनि को भी गोविंद राधे।
22यह माया नर ते बानर बना दे॥ 1121॥
23जनों की अविद्या को गोविंद राधे।
24नष्ट करे वाको जनार्दन बता दे॥ 1122॥