Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
शरणागति, कृपा · पृष्ठ 92
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1कहा सुभद्रा ने गोविंद राधे।
2जाओ मैं रक्षा करूँगी बता दे॥ 1039॥
3पार्थ ते सुभद्रा ने गोविंद राधे।
4कहा यह सब वृत्तान्त बता दे॥ 1040॥
5पार्थ ने भी प्रण किया गोविंद राधे।
6चित्रसेन रक्षा करूँगा बता दे॥ 1041॥
7पार्थ कृष्ण युद्ध हुआ गोविंद राधे।
8पार्थ पाशुपत कृष्ण चक्र उठा दे॥ 1042॥
9तब आये शंकर गोविंद राधे।
10बीच बचाव किया उन्होंने बता दे॥ 1043॥
11गालव ने उठाया जल गोविंद राधे।
12सब को ही शाप देने को बता दे॥ 1044॥
13सुभद्रा शक्ति ने गोविंद राधे।
14जल को न गिरने दिया हाथ ते बता दे॥ 1045॥
15पाप अरु दण्ड बिच गोविंद राधे।
16होड़ है अनादि कोउ कोउ ना हरा दे॥ 1046॥
17हरि की शरण में जा गोविंद राधे।
18अगनित पापों ते मुक्त करा दे॥ 1047॥
19अगणित जन्मों के गोविंद राधे।
20शुभाशुभ कर्मों के बन्धन छुड़ा दे॥ 1048॥
21द्वार द्वार भीख माँगा गोविंद राधे।
22हरि द्वार जा हरि प्रेम सुधा दे॥ 1049॥
23मायिक मन दे दे गोविंद राधे।
24कृष्ण दिव्य मन करि तोहिं लौटा दे॥ 1050॥