Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
शरणागति, कृपा · पृष्ठ 91
Reading 103 of 516 · Source nos. 1027–1038 · Source PDF 108
1अकस्मात वह पीक गोविंद राधे।
2गालव अंजलि में आ गिरी बता दे॥ 1027॥
3गालव गये कृष्ण ढिग गोविंद राधे।
4चित्रसेन नीचता बताया बता दे॥ 1028॥
5कृष्ण ने प्रतिज्ञा की गोविंद राधे।
6चौबीस घंटे में मारूँगा बता दे॥ 1029॥
7चित्रसेन नारद ढिग गोविंद राधे।
8गया, कहा, आपकी शरण हूँ बता दे॥ 1030॥
9नारद ने कहा जाओ गोविंद राधे।
10अर्धरात्रि यमुना तट रोना बता दे॥ 1031॥
11वहाँ आयेंगी एक गोविंद राधे।
12नारी रक्षा वर माँगना बता दे॥ 1032॥
13पुनि गये नारद गोविंद राधे।
14पास सुभद्रा के कहा यह बता दे॥ 1033॥
15यमुना नहाने का गोविंद राधे।
16आज बहुत बड़ा फल है बता दे॥ 1034॥
17वहाँ जो भी जो भी माँगे गोविंद राधे।
18वर, उसे वर देना अवशि बता दे॥ 1035॥
19सुभद्रा नहाने गईं गोविंद राधे।
20चित्रसेन जोर जोर रोया बता दे॥ 1036॥
21पूछा सुभद्रा ने गोविंद राधे।
22कहो तुम्हें कौन सा कष्ट है बता दे॥ 1037॥
23चित्रसेन ने बताया गोविंद राधे।
24अपनी पूरी कहानी बता दे॥ 1038॥