लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content
Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

मानव देह · पृष्ठ 82

Reading 94 of 516 · Source nos. 931–942 · Source PDF 99

1भजूँगा भजूँगा कहि गोविंद राधे।

2काहे अगनित जन्म यूँ ही गमा दे॥ 931॥

3करूँगा करूँगा कहि गोविंद राधे।

4बीते युग युग भक्ति अब तो करा दे॥ 932॥

5करूँगा करूँगा इमि गोविंद राधे।

6जनि करु करु हरि भक्ति बता दे॥ 933॥

7अवसर बीत्यो जात गोविंद राधे।

8भजूँगा भजूँगा कहे कब लौं बता दे॥ 934॥

9अवसर बीत्यो जात गोविंद राधे।

10आज कालि परसों में बरसों गँवा दे॥ 935॥

11अवसर बीत्यो जात गोविंद राधे।

12काल लगायो घात नींद को भगा दे॥ 936॥

13अवसर बीत्यो जात गोविंद राधे।

14इस नर तनु में तो बिगरी बना दे॥ 937॥

15अवसर बीत्यो जात गोविंद राधे।

16नर तनु सुर दुर्लभ है बता दे॥ 938॥

17अभी भक्ति करो काल गोविंद राधे।

18जाने कब राम नाम सत्य करा दे॥ 939॥

19आज कहे कालि करुँगोविंद राधे।

20कालि कहे काल ऐसे जनम गवाँ दे॥ 940॥

21कालि कालि जनि करु गोविंद राधे।

22जाने आजु काल लाल झण्डी दिखा दे॥ 941॥

23आजु करुँकहो जनि गोविंद राधे।

24अभी करुँ यह कहि मन को लगा दे॥ 942॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

Source edition and PDF · Text version