Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मानव देह · पृष्ठ 81
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1यौवन दो दिन गोविंद राधे।
2आयु भी है चार दिन मद क्यों बता दे॥ 919॥
3बल नहिं काल सम गोविंद राधे।
4पुनि बल का अभिमान क्यों बता दे॥ 920॥
5जो भी आए जाए वह गोविंद राधे।
6मायाधीन हो या मायामुक्त बता दे॥ 921॥
7आने को सब जानें गोविंद राधे।
8जाने को जानें मायामुक्त बता दे॥ 922॥
9आने में सुख जैसा गोविंद राधे।
10जाने में दुःख वैसा ही हो बता दे॥ 923॥
11संचय अंत क्षय गोविंद राधे।
12उत्थान का अंत पतन बता दे॥ 924॥
13विरह मिलन अंत गोविंद राधे।
14जीवन का अन्त है मरण बता दे॥ 925॥
15प्रतिदिन जाते लखि गोविंद राधे।
16बचे हुए जग सुख सत्य बता दे॥ 926॥
17अब लौं गमाया तूने गोविंद राधे।
18अब हरि गुरु में ही मन को लगा दे॥ 927॥
19बीता सो बीता भूत गोविंद राधे।
20वर्तमान को तो मूढ़ भक्ति ते बना दे॥ 928॥
21मनमानी खाया सोया गोविंद राधे।
22भूत सब खोया अब भावी बना दे॥ 929॥
23प्रति जन्मदिन पै गोविंद राधे।
24सोचो आयु बीती जाती भक्ति करा दे॥ 930॥