Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मानव देह · पृष्ठ 78
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1हरि कृपा तनु पाया गोविंद राधे।
2तू भी कृपा करु मन को लगा दे॥ 883॥
3गर्भ में किये थे वादे गोविंद राधे।
4भक्ति ही करूँगा किंतु भूल गये वादे॥ 884॥
5अमर सुरहु मरे गोविंद राधे।
6नर माने अमर जो हरि को भुला दे॥ 885॥
7सुर नर मुनि सब गोविंद राधे।
8काल केकलेवा बने बनेंगे बता दे॥ 886॥
9बाल युवा वृद्ध सब गोविंद राधे।
10हरि भजु जाने कब तनु धोखा दे॥ 887॥
11पा भी लो कुबेर पद गोविंद राधे।
12एक दिन काल वाको कवल बना दे॥ 888॥
13नर की बिसात क्या है गोविंद राधे।
14इन्द्र को भी जाना होगा स्वर्ग ते बता दे॥ 889॥
15बड़े बड़े ज्ञानी ध्यानी गोविंद राधे।
16एक दिन होंगे काल कवल बता दे॥ 890॥
17तन धन धाम सब गोविंद राधे।
18छोड़ जाय कर्म साथ जायें बता दे॥ 891॥
19मोह निशा में सोया गोविंद राधे।
20आदि मध्य खोया अब अन्त तो बना दे॥ 892॥
21जनम अनन्त खोया गोविंद राधे।
22अन्त में मन निज कन्त में लगा दे॥ 893॥
23जीव जब तनु त्यागे गोविंद राधे।
24जग कहे तनु तो है माटी बता दे॥ 894॥