Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मानव देह · पृष्ठ 77
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1लोहार धौंकनी भी गोविंद राधे।
2वायु ग्रहण त्याग करती बता दे॥ 871॥
3ग्राम के अन्य पशु गोविंद राधे।
4खाते विषय भोग करते बता दे॥ 872॥
5ऐसे हरि भक्ति बिनु गोविंद राधे।
6नर जीवन पशुवत है बता दे॥ 873॥
7कृष्ण भक्ति बिनु नर गोविंद राधे।
8कूकर शूकर सम हैं बता दे॥ 874॥
9नर सम विषयी न गोविंद राधे।
10पशु पक्षी कीट पतंग बता दे॥ 875॥
11जीव तो है तोता सम गोविंद राधे।
12तन हाड़ माँस का है पिँजरा बता दे॥ 876॥
13हाड़ माँस पिँजड़ा है गोविंद राधे।
14तनु किन्तु नर तनु हरि ते मिला दे॥ 877॥
15नर देह को न कोसो गोविंद राधे।
16नर देह ही तो तोहिं हरि ते मिला दे॥ 878॥
17राधे राधे बोल मन गोविंद राधे।
18सुर दुर्लभ तनु सफल बना दे॥ 879॥
19राधे राधे बोल मन गोविंद राधे।
20तन का भरोसा नहिं छन में छिना दे॥ 880॥
21राधे राधे बोल मन गोविंद राधे।
22जाने काल कब तेरा टिकट कटा दे॥ 881॥
23राधे राधे बोल मन गोविंद राधे।
24अब लौं नसाया अब तो ना नसा दे॥ 882॥