Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मानव देह · पृष्ठ 75
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1नर की तो छाया हो गोविंद राधे।
2देव के शरीर की न छाया बता दे॥ 847॥
3नर तनु पै धूलि गोविंद राधे।
4देव तनु पै धूलि लगे ना बता दे॥ 848॥
5नर तनु फूल माला गोविंद राधे।
6मुरझाये, देव तनु एक सी बता दे॥ 849॥
7नर तनु मल मूत्र गोविंद राधे।
8देव तनु मल मूत्र रहित बता दे॥ 850॥
9मल मूत्र का पिटारा गोविंद राधे।
10किन्तु नर तनु सुर चाहें बता दे॥ 851॥
11सुर योनि भोग योनि गोविंद राधे।
12नर योनि ही कर्मयोनि बता दे॥ 852॥
13स्वर्ग लोक में भी माया गोविंद राधे।
14फल भोग पश्चात् पतन करा दे॥ 853॥
15स्वर्ग में भी काम क्रोध गोविंद राधे।
16लोभ आदि का अधिकार बता दे॥ 854॥
17देवासुर युद्ध में गोविंद राधे।
18विजय हुई थी देवों की बता दे॥ 855॥
19देवों को गर्व हुआ गोविंद राधे।
20हमने ही असुरों को जीता बता दे॥ 856॥
21हरि ने यक्ष बनि गोविंद राधे।
22गर्व चूर चूर कर दिया था बता दे॥ 857॥
23मृत्यु लोक जन सम गोविंद राधे।
24स्वर्ग सुर भी मायाधीन बता दे॥ 858॥