Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
मानव देह · पृष्ठ 73
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2मायाबद्ध जीव कभु गोविंद राधे।
3देहरहित नहिं रहता बता दे॥ 829॥
4देह है जरायुज गोविंद राधे।
5अण्डज उद्भिज स्वेदज बता दे॥ 830॥
6देह की अवस्था तीन गोविंद राधे।
7जाग्रत स्वप्न सुषुप्ति बता दे॥ 831॥
8एक अवस्था और गोविंद राधे।
9ज्ञानियों की वाय तुरीय बता दे॥ 832॥
10देह परिणाम तीन गोविंद राधे।
11कृमि अरु भस्म अरु विष्ठा बता दे॥ 833॥
12देह तो मरण शील गोविंद राधे।
13किन्तु दिव्य प्रेम अमरत्व दिला दे॥ 834॥