Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
जीव का लक्ष्य · पृष्ठ 72
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1एक और मन भी है गोविंद राधे।
2उसका ही रूप दूजा बुद्धि बता दे॥ 819॥
3बुद्धि केअधीन मन गोविंद राधे।
4मन केअधीन हैं इन्द्रिय बता दे॥ 820॥
5जीव दास हरि का है गोविंद राधे।
6देह दास जीव का है तत्त्व बता दे॥ 821॥
7जिसकी भी आदि होगी गोविंद राधे।
8एक दिन उसका हो अन्त बता दे॥ 822॥
9जिसकी न आदि होगी गोविंद राधे।
10उसका न अन्त हो अनन्त बता दे॥ 823॥
11देह की है आदि याते गोविंद राधे।
12देह का हो अन्त अवश्य बता दे॥ 824॥
13आत्मा की आदि नहिं गोविंद राधे।
14याते आत्मा तो है नित्य बता दे॥ 825॥
15हरि अज मैं भी अज गोविंद राधे।
16हरि ने बनाया मोहिं झूठ बता दे॥ 826॥
17हरि पिता मैं हूँ सुत गोविंद राधे।
18आयु में समान दोनों पिता को बता दे॥ 827॥
19ब्रह्म, जीव, माया, वेद गोविंद राधे।
20चारों हैं अनादि अनन्त बता दे॥ 828॥