Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
जीव का लक्ष्य · पृष्ठ 71
Reading 83 of 516 · Source nos. 807–818 · Source PDF 88
1श्रीकृष्ण दर्शन गोविंद राधे।
2जीव का चरम लक्ष्य नाहिं बता दे॥ 807॥
3वस्तुतस्तु कृष्ण की गोविंद राधे।
4प्रेममयी सेवा है लक्ष्य बता दे॥ 808॥
5दूसरे हम देह का तो गोविंद राधे।
6लक्ष्य है क्षणिक सुख भोग बता दे॥ 809॥
7“हम” जीव एक ही थे गोविंद राधे।
8एक हैं एक ही रहेंगे बता दे॥ 810॥
9“हम” देह तो अनन्त गोविंद राधे।
10हो चुके अब तक सब को बता दे॥ 811॥
11“हम” जीव का रूप गोविंद राधे।
12जीवात्मा अरु महात्मा बता दे॥ 812॥
13“हम” देह का रूप गोविंद राधे।
14स्थूल सूक्ष्म अरु कारण है बता दे॥ 813॥
15“हम” देह में तो है गोविंद राधे।
16इन्द्रिय मन अरु बुद्धि बता दे॥ 814॥
17पाँच तो कर्मेन्द्रिय गोविंद राधे।
18पाँच ज्ञानेन्द्रिय दस हैं बता दे॥ 815॥
19पाँच ज्ञानेन्द्रियों का गोविंद राधे।
20सारा विश्व विषय है पाँच बता दे॥ 816॥
21पाँच ज्ञान इन्द्रिय गोविंद राधे।
22श्रोत्र, नेत्र, त्वक्, नासा, रसना बता दे॥ 817॥
23ज्ञान इन्द्रिय विषय गोविंद राधे।
24शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध बता दे॥ 818॥