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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

जीव का लक्ष्य · पृष्ठ 70

Reading 82 of 516 · Source nos. 795–806 · Source PDF 87

1जीव के भेद दो हैं गोविंद राधे।

2एक बद्ध एक है मुक्त बता दे॥ 795॥

3देह केभेद दो हैं गोविंद राधे।

4एक दिव्य अरु एक मायिक बता दे॥ 796॥

5“हम” जीव तो सत्य गोविंद राधे।

6“हम” देह मिथ्या है तत्त्व बता दे॥ 797॥

7“हम” जीव तो दिव्य गोविंद राधे।

8“हम” देह मायिक है तत्त्व बता दे॥ 798॥

9“हम” जीव अंश हरि गोविंद राधे।

10“हम” देह पंच महाभूत का बता दे॥ 799॥

11“हम” जीव नित्य तत्त्व गोविंद राधे।

12“हम” देह शीर्णशील नश्वर बता दे॥ 800॥

13“हम” जीव कर्ता भोक्ता गोविंद राधे।

14देह भोग्य इन्द्रिय मन है बता दे॥ 801॥

15“हम” जीवात्मा का गोविंद राधे।

16एक है हमारा परमात्मा बता दे॥ 802॥

17दूसरे “हम” देह का गोविंद राधे।

18सारा संसार है हमारा बता दे॥ 803॥

19“हम” जीवात्मा का गोविंद राधे।

20सुख है अनन्त अरु नित्य बता दे॥ 804॥

21दूसरे “हम” देह का गोविंद राधे।

22सुख तो है दुखयुक्त नश्वर बता दे॥ 805॥

23“हम” जीवात्मा का गोविंद राधे।

24लक्ष्य है श्रीकृष्ण सेवा बता दे॥ 806॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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