Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
जीव का लक्ष्य · पृष्ठ 69
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1जीव ब्रह्म सम्बन्ध गोविंद राधे।
2साजात्य सख्य सादेश्य बता दे॥ 783॥
3“द्वा सुपर्णा” मंत्र में तो गोविंद राधे।
4दो सखा बालक पालक बता दे॥ 784॥
5“द्वा सुपर्णा” वेद मंत्र गोविंद राधे।
6कहे तेरे नित्य सखा कृष्ण हैं बता दे॥ 785॥
7जहाँ जहाँ जीव जाये गोविंद राधे।
8तहाँ तहाँ कृष्ण सखा जाये बता दे॥ 786॥
9हरि की ही गोद में तो गोविंद राधे।
10जीव का है नित्य निवास बता दे॥ 787॥
11सिन्धु की तरंग जैसे गोविंद राधे।
12जल ते हो ओतप्रोत बता दे॥ 788॥
13कृष्ण अंश जीव वैसे गोविंद राधे।
14कृष्ण ते है ओत प्रोत बता दे॥ 789॥
15अग्नि चिन्गारियों में गोविंद राधे।
16अग्नि केसब गुण रहें ज्यों बता दे॥ 790॥
17वैसे अंश जीव में भी गोविंद राधे।
18कृष्ण के गुणों का आभास बता दे॥ 791॥
19हम दो हमारे दो गोविंद राधे।
20इतना ही बस तत्त्वज्ञान है बता दे॥ 792॥
21हम हैं दो कौन गोविंद राधे।
22कौन दो हमारे हैं यह भी बता दे॥ 793॥
23“हम” एक जीव भी है गोविंद राधे।
24“हम” एक देह भी है तत्त्व बता दे॥ 794॥