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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

जीव का लक्ष्य · पृष्ठ 68

Reading 80 of 516 · Source nos. 771–782 · Source PDF 85

1उच्च साधक यदि गोविंद राधे।

2मर जाय तो कौन गति हो बता दे॥ 771॥

3वह उच्च साधक गोविंद राधे।

4उच्च साधक घर जन्म ले बता दे॥ 772॥

5पुनि सत्संग द्वारा गोविंद राधे।

6वाते भी आगे करे साधना बता दे॥ 773॥

7साधना का फल हरि गोविंद राधे।

8अपर जन्म में देंगे बता दे॥ 774॥

9क्या क्या चाहे तू गोविंद राधे।

10क्या क्या न चाहे तू यह भी बता दे॥ 775॥

11जग का अभाव चाहूँ गोविंद राधे।

12गोपी प्रेम भाव चाहूँ गोपी ते दिला दे॥ 776॥

13हरि तेरा सुख चाहूँ गोविंद राधे।

14निज सुख नहिं चाहूँ उत्तर बता दे॥ 777॥

15कछु नहिं चाहूँ तो सों गोविंद राधे।

16यह चाहूँ चाह मेरी जड़ ते मिटा दे॥ 778॥

17प्रेम निष्काम चाहूँ गोविंद राधे।

18भुक्ति मुक्ति बैकुण्ठ सुख मोहिं ना दे॥ 779॥

19हम कौन हरि कौन गोविंद राधे।

20हरि ते हमारा कौन नाता जना दे॥ 780॥

21हम दास स्वामी हरि गोविंद राधे।

22हरि ते हमारा सब नाता बता दे॥ 781॥

23जीव ब्रह्म सम्बन्ध गोविंद राधे।

24सायुज्य भी जीव ब्रह्म में बता दे॥ 782॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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