Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
जीव का लक्ष्य · पृष्ठ 67
Reading 79 of 516 · Source nos. 759–770 · Source PDF 84
1तुम तो हो जगस्रष्टा गोविंद राधे।
2हम तो हैं सृज्य यह भेद बता दे॥ 759॥
3ब्रह्म अंशी जीव अंश गोविंद राधे।
4अंशी अंश में भेदाभेद बता दे॥ 760॥
5जीव तो है ब्रह्म शक्ति गोविंद राधे।
6याते जीव को ब्रह्म अंश बता दे॥ 761॥
7शक्ति शक्तिमान में तो गोविंद राधे।
8भेद भी नहीं है भेद भी है बता दे॥ 762॥
9कौन हूँ मैं किसका हूँ गोविंद राधे।
10कौन मेरा तीनों बातें कोई बता दे॥ 763॥
11दास हूँ मैं स्वामी का गोविंद राधे।
12स्वामी मेरे हरि प्रश्नकर्ता को बता दे॥ 764॥
13मेरा साध्य क्या है अरु गोविंद राधे।
14साधन क्या है कोई याय समझा दे॥ 765॥
15तेरा साध्य हरि सेवा गोविंद राधे।
16साधन श्रीकृष्ण भक्ति बता दे॥ 766॥
17हरि भक्ति भी हो अरु गोविंद राधे।
18निष्कामता भी हो तो साध्य दिला दे॥ 767॥
19हरि सर्वव्यापक गोविंद राधे।
20यह मानना ही तेरा साध्य दिला दे॥ 768॥
21हरि तेरे उर रह गोविंद राधे।
22यह मानना ही तोहिं हरि ते मिला दे॥ 769॥
23हरि में निवास तेरा गोविंद राधे।
24यह मानना ही तोहिं लक्ष्य दिला दे॥ 770॥