Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
जीव का लक्ष्य · पृष्ठ 66
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1तेरे पास भी है माया गोविंद राधे।
2मेरे पास भी है माया भेद क्या बता दे॥ 747॥
3तू भी निज जन प्रेमी गोविंद राधे।
4मैं भी निज जन प्रेमी भेद क्या बता दे॥ 748॥
5तेरे भी जन्म कर्म गोविंद राधे।
6मेरे भी जन्म कर्म भेद क्या बता दे॥ 749॥
7तू भी सुखी दुखी होवे गोविंद राधे।
8मैं भी सुखी दुखी होउँ भेद क्या बता दे॥ 750॥
9तेरे भी माता पिता गोविंद राधे।
10मेरे भी माता पिता भेद क्या बता दे॥ 751॥
11तूने भी भुलाया मोहिं गोविंद राधे।
12मैंने भी भुलाया तोहिं भेद क्या बता दे॥ 752॥
13तुममें हममें भेद यही गोविंद राधे।
14तुम अंशी हम अंश बता दे॥ 753॥
15हममें तुममें भेद यही गोविंद राधे।
16तुम हो नियन्ता हम नियम्य बता दे॥ 754॥
17हममें तुममें भेद यही गोविंद राधे।
18तुम सर्वज्ञ हम अज्ञ बता दे॥ 755॥
19तुम तो हो मुक्तिदाता गोविंद राधे।
20हम हैं अनादिबद्घ भेद बता दे॥ 756॥
21तुम तो सर्वव्यापक गोविंद राधे।
22हम तो हैं व्याप्य यह भेद बता दे॥ 757॥
23तुम तो सर्वशक्तिमान गोविंद राधे।
24हम अल्पशक्तिमान भेद बता दे॥ 758॥