Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
जीव का लक्ष्य · पृष्ठ 63
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1जगसुख मायिक गोविंद राधे।
2परिणाम दुख बाधा विविध बता दे॥ 711॥
3बार बार सारा जग गोविंद राधे।
4छान मारा कहुँ सुख मिला ना बता दे॥ 712॥
5जलचर भूचर गोविंद राधे।
6खेचर बनि देखा धोखा बता दे॥ 713॥
7चराचर घर देखा गोविंद राधे।
8क्षण भर को भी मिला चैन ना बता दे॥ 714॥
9ब्रह्म लोक तक देखा गोविंद राधे।
10स्वप्न में भी सुख कभु मिला ना बता दे॥ 715॥
11हम चाहें भूमा सुख गोविंद राधे।
12अल्प सुख ते कैसे सुखी हों बता दे॥ 716॥
13श्रोत्र नेत्र भौतिक गोविंद राधे।
14किन्तु दोनों ही विषय पृथक बता दे॥ 717॥
15दिव्य आत्मा का जग गोविंद राधे।
16भौतिक विषय हो कैसे बता दे॥ 718॥
17जग सुख क्षणिक है गोविंद राधे।
18कभु मिले कभु छिन जाय बता दे॥ 719॥
19जग सुख तो अल्प गोविंद राधे।
20प्यास नहिं जाये प्यास और बढ़ा दे॥ 720॥
21सच्चा ईश्वरीय सुख गोविंद राधे।
22सदा सदा को मिल जाय बता दे॥ 721॥
23जलनिधि में न जल गोविंद राधे।
24जल-निधि ही है जलनिधि बतला दे॥ 722॥